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नोटबंदी की वर्षगांठ और डिजीटेलाइजेशन

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तारीख 8 तो लोगों को याद ना हो लेकिन नवम्बर 2016 लोगों को भुलाए नहीं भूलता। नोटबंदी ने ना केवल इस देश के प्रत्येक नागरिक को   बल्कि उसका असर धीरे-धीरे और भी गहरा हो गया है। घरों में नोट रखना प्रत्येक बड़े-बूढे का एक विशेष अधिकार होता था जो उसे सदियों से विरासत में मिला हुआ था। हमने बचपन में एक कहानी भी पढ़ी थी कि एक घर में चार बेटे और उनकी बहुएं थी जो बूढ़े मां-बाप का ध्यान नहीं रखती थी। तभी बूढ़ी मां को एक युक्ति सूझी। उसने अपने पति से कहा कि ये जो हमारी चारपाई के नीचे लोहे का ट्रंक पड़ा हुआ है उसमें अलीगढ़ का मजबूत ताला लाकर लगा दो। बुजुर्ग ने ऐसा ही किया और ये ताला उन्होंने अपनी खाट के नीचे रखे ट्रंक में लगा दिया और आते-जाते हर घर के सदस्य और खासतौर से बहुओं को अब ताला खटकने लगा। आपस में चर्चा होती थी कि लगता है कि बुडढे-बुढ़िया के पास बहुत धन है जिसकी निगरानी दोनों हर समय करते हैं। बहुओं में चर्चा आगे बढ़ी और अब उन्हें पक्का यकीन हो गया कि धन तो होगा ही साथ में सोना, हीरे-जवाहरात भी होंगे वरना इतनी निगरानी थोड़े ही कोई करता है। अब रोज सारी बहुएं और बेटे सेवा करने लगे। पहले बुजुर्ग निकल गये तब भी बूढ़ी मां की सेवा-सुश्रुर्षा में कमीं नहीं आयी। बाद में मां भी नहीं रही और उसके बाद में जब ताला तोड़ा गया तो उसमें पुराने कपड़े-लत्ते थे लेकिन उन दोनों की जिंदगी बड़े मजे में गुजर गयी। नोटबंदी ने ना केवल हमे एक दूसरे के सामने आर्थिक रूप से नंगा कर दिया बल्कि जो भ्रम या मुगालता हम सबने पाल रखा था उसे भी तोड़ दिया। हमें यानी देश को यह तो नही मालूम पड़ा कि कितना काला धन सरकार को प्राप्त हुआ परन्तु देश के नागरिको ने आपस में एक दूसरे से जो छौटा मौटा गुप्त धन वर्षो की मश्कत के बाद इक्कठा किया था वहीं काला धन सरकार को प्राप्त हुआ। निसदेंह इस उपलब्धि पर सरकार अपनी पीठ ठोक सकती है।

नोटबंदी की वर्षगांठ 8 नवम्बर को है और पहले 8 नवम्बर 2016 की कुंडली और साथ ही 2017-2018 की वर्ष कुंडली का विश्लेषण प्रस्तुत है। लग्न - मिथुन, राहू - सिंह, बृहस्पति - कन्या, सूर्य, बुध - तुला, शनि - वृश्चिक, शुक्र - धनु, मंगल - मकर और चन्द्र, केतु - कुम्भ राशि में विराजमान थे।  

साथ में देश की कुंडली इस प्रकार है: वृष - लग्न, लग्न में राहू, मंगल - मिथुन, सूर्य, चन्द्र, बुध, शुक्र, शनि - कर्क, बृहस्पति - तुला और केतु वृश्चिक में स्थित थे।

हमारा ऐसा मानना है कि देश शास्वत होता है। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति आते-जाते रहते हैं और हर शासक अपनी बुद्धि और योग्यता के अनुसार देश के हित में बहुत कुछ करना चाहता है। इतिहास में कुछ एक ऐसे शासक भी हुए हैं जिन्होने शासन की बागडोर संभालने के बाद देश की नीति और व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन कर डाले। इतिहास उन सारे शासकों के उदाहरणों से भरा पड़ा है जिनके शासन के दौरान भारतवर्ष सोने की चिड़िया कहलाने लगा और फिर कुछ ऐसे भी हुए जिनके कारण हजार साल की गुलामी भी हुई। 

हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री के मन की बहुत गहराई में यह बात पूरी तरह से पैठी हुई है कि मुझे एक ऐसा ऐतिहासिक शासक बनना है जिसे आने वाली पीढ़ियां बड़े गर्व से याद रख सकें। अगर ऐसा नहीं होता तो फिर प्रधानमंत्री मोदी ऐसे फैसले नहीं लेते जिनकी जुर्ररत आज तक किसी ने नहीं की। भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है यह तो भविष्य ही तय करेगा लेकिन ज्योतिष एक ऐसा विषय है जो भविष्य में होने वाली घटनाओं का सटीक अंदाजा वर्तमान में लगा लेता है। बात देश की कुंडली से करते हैं फिर नोटबंदी और बीच में कहीं प्रधानमंत्री मोदी की कुंडली का जिक्र भी करेंगे।

भारतवर्ष का लग्न वृष है और लग्न में राहू और सप्तम में केतु बैठे हैं। तृतीय भाव में पांच ग्रह कमशः - सूर्य, शनि, शुक्र, बुध और चन्द्रमा बैठे हैं। वर्तमान में 10 सितम्बर 2015 से दस वर्षीय चन्द्रमा की दशा चल रही है जो सितम्बर 2025 में समाप्त होगी। जैसा कि विदित है चन्द्रमा चार ग्रहों के साथ तृतीय भाव में बैठा हुआ है। ये सारे ग्रह मिलकर एक प्रवज्र राजयोग भी बनाते हैं। शास्त्रों में राजयोगों की व्याख्या कई तरीके से की गई है और हमने अपने अनुभव से इन राजयोगों में कई तरह की विसंगतियां भी देखी जिनका जिक्र करना अति आवश्यक है। साधारणतः हम ऐसा समझते हैं कि अगर कुंडली में राजयोग है तो जैसे कोई जादू की छड़ी हाथ लग गयी। इधर छड़ी घुमाई नहीं उधर मनचाहे परिणामों की झड़ी लग गयी।  

इस प्रवज्र राज योग में चन्द्रमा भी शामिल है और वर्तमान में चन्द्रमा की महादशा चल रही है जो 2025 तक चलने वाली है।

किसी भी राजयोग कि खुबसूरती यह है कि आप किसी एक ग्रह को अलग करके बात नहीं कर सकते। राजयोग का विरोधाभास यह है कि प्रत्येक ग्रह अपनी महादशा में जो फल देता है वह अधिकाशतः उस ग्रह के निमिŸा जो फल होते है वे ही डोमिनेट करते है। चन्द्रमा तृतीय भाव में यू तो अपनी राशि कर्क में स्थित है लेकिन वृष लग्न के साथ उसका तालमेल ज्यादा नहीं बैठता। तृतीय भाव ‘उपचय भाव‘ कहलाता है और वहाॅ पर शुभ ग्रह पीडित हो जाता है। चन्द्रमा प्रर्वज्र राजयोग में एक मूल ईकाई है तो वहाॅ चन्द्रमा अच्छे फल देने लायक भी है। अगर हमें इस राजयोग में चन्द्रमा के फलो का आंकलन करना है तो इन सारे तथ्यों का विश्लेषण करना अति आवश्यक है।  

ज्योतिष में बुध ग्रह को मूलतः युवा माना जाता है लेकिन हमारी समझ से अगर ज्योतिष में कोई सबसे युवा ग्रह है तो वह चन्द्रमा है। चन्द्रमा मन का कारक है और मन कभी वृद्व नहीं होता। भारत एक युवा देश है और 65 प्रतिशत देश की जनसंख्या युवा है। ज्योतिष में तृतीय भाव पराक्रम का प्रतिनिधित्व करता है। इसका आशय यह हुआ कि देश का प्रत्येक नागरिक अपना पराक्रम दिखाने को तैयार है और अगर उसे सही दिशा और निर्देश दिये जा सके तो वो कमाल कर सकता है। ज्योतिष में चन्द्रमा का संबध धन से होता है और चन्द्रमा देश कि कुन्डली में शनि के साथ युति में है। शनि धन पर हर तरह का अंकुश लगाता है इसलिए किसी को आश्चर्य नही करना चाहिए कि चन्द्रमा की महादशा में प्रधानमंत्री मोदी ने अचानक नोटबंदी की घोषणा 8 नवंबर 2016 को कर दी।

चन्द्रमा व्यक्ति, देश, दुनिया या काॅसमोस का मन होता है और नोटबंदी के साथ ही भारत कि जनता का मन मर गया और राशन कि लाइनो से अधिक अपने ही नोट निकालने में लोग बैकों की कतार में लग गऐ और 1000 से ऊपर मर भी गए। सरकार आसानी से कह सकती है कि जब देश के हित में बड़े फैसले लिए जाते तो कुछ लोगो का देश में मरना लाजमी हो जाता है क्योकि बलिदान देश के लिए दिया ही जाना चाहिए। अगर मुद्वा मात्र इतने से इतना ही होता तो फिर भी कुछ संतोष कर सकते है लेकिन एक वर्ष के बाद भी भारत की आम जनता की आर्थिक स्थिति

बद से बदतर तो हुई है लेकिन सुधार आंकड़ो में हुआ है और जमीनी हालात हम सबको मालूम है। उल्लेखनीय है कि मोदी की कुन्डली में भी नीच के चन्द्रमा की भी महादशा चल रही है। हाॅलाकि इनके चन्द्रमा का नीच भंग तो हुआ है लेकिन नीच ग्रह नीच ही होता है। नीच ग्रह की व्याख्या कई तरीके से की जा सकती है लेकिन नीच ग्रह का सीधा सा अर्थ होता है कि व्यक्ति स्वंय को और अपने लोगो को संकट में डाल देता है। 

नोटबंदी 8 नवंबर 2016 को हुई थी उस समय मिथुन लग्न उदय हुआ था। पंचम भाव में सूर्य और 29ण्41 डिग्री पर बुध भी पंचम भाव में था। इसका सीधा सा अर्थ यह हुआ कि बुध चलित कुण्डली में छटे भाव के फल देगा। नोटबंदी के साथ ही सबसे कठिन दौर से मोदी जी को निकलना पड़ा या यू कहे कि कठिन दौर खत्म नहीं हुआ और जनता कि आर्थिक कठिनाई लगातार बढ़ती ही जा रही है। 8 नंवबर 2017 को जो नई वर्ष कुन्डली बन रही है उसमें मुंथा बारहवे भाव में राहू के साथ है इसका सीधा सा अर्थ यह हुआ कि आर्थिक तंगी बढ़ने वाली है।

कोढ में खाज एक देसी मुहावरा है जो जी एस टी के लागू होने से पूरी तरह अमल में आ गया। हमने सुना है कि सरकार नोटबंदी का जश्न मना रही है और विरोधी नोटबंदी का मातम। ज्योतिष पक्षपात नही करता लेकिन ग्रह स्थिति यह बताती है कि आने वाले एक और वर्ष में जनता कई भविष्य में होने वाले रिबेट या कन्सेशन के बाद भी आर्थिक सहूलियत की स्थिति में नहीं आ रही। वर्तमान सरकार कैसे इस स्थिती से निबटती है यह देखना बाकी है।


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